–    नीता भल्ला

     नई दिल्ली, 31 मई (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – वैश्विक गुलामी सूचकांक के अनुसार विश्‍व में सबसे अधिक- एक करोड़ 80 लाख- गुलाम भारत में हैं, जो ऋण बंधन के जाल में जकड़े हुये हैं, उनकी जबरन शादी कर दी जाती है, उन्‍हें वेश्यालयों में बेच दिया जाता है या वे गुलामी की स्थिति में पैदा होते हैं। वैश्विक गुलामी सूचकांक के एक अध्‍ययन में पाया गया कि इन समस्‍याओं से निपटने के लिये सरकार ने कारगर कदम उठाये हैं।

  हालांकि ऑस्ट्रेलिया के वॉक फ्री फाउंडेशन द्वारा 167 देशों में किये गये सर्वेक्षण में पाया गया कि इन सभी देशों में यह समस्‍या है, लेकिन दुनिया के 40 प्रतिशत-अनुमानित चार करोड़ 58 लाख दास भारत में हैं।

  वॉक फ्री में वैश्विक अनुसंधान की प्रमुख फियोना डेविड का कहना है कि बेहतर डाटा एकत्रित करने के कारण पिछले आंकड़ों की तुलना में भारत में गुलामी की स्थिति में करीबन 15 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी हुई है, लेकिन इस तरह के शोषण की रोकथाम के लिए सरकार ने काफी प्रयास किये हैं।

  डेविड ने कहा, “2016 में गुलामी के मामले हमारी सोच से काफी अधिक थे। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि यह संख्या पिछले वैश्विक गुलामी सूचकांक के बाद बढ़ी हो, बल्कि हमारी बेहतर गणना प्रक्रिया की वजह से हमें यह पता चल पाया है।”

     “लेकिन नयी बात यह है कि भारत सरकार कानून के अलग अलग हिस्‍सों को एकजुट कर तस्करी रोधी अधिनियम लाने का महत्‍वपूर्ण कदम उठा रही है। यह एक बड़ा कदम है।”

  सूचकांक ने पाया कि समग्र दृष्टि से एक करोड़ 83 लाख 50 हजार पर 1.3 अरब की आबादी वाले भारत में सबसे अधिक गुलाम हैं। उसके बाद क्रम में चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और उजबेकिस्तान में सबसे अधिक गुलाम हैं।

  हालांकि सूचकांक में गुलामी के प्रचलन के मामले में जनसंख्या के आधार पर 1.4 प्रतिशत पर भारत चौथे स्थान पर है। उससे ऊपर उत्तर कोरिया, उज्बेकिस्तान, कंबोडिया का स्‍थान है।   

  “जबरन शादी, बाल सैनिक”

    अमेरिका के सर्वेक्षक गैलप द्वारा विश्व स्तर पर लगभग 42 हजार लोगों से किये साक्षात्कार के आधार पर तीसरा सूचकांक तैयार किया गया है। साक्षात्‍कार किये गये लोगों में से 14 हजार लोग भारत के हैं।

      इसमें कहा गया कि अंतर-पीढ़ीगत बंधुआ मजदूरी, जबरन बाल श्रम, देह व्‍यापार के लिये शोषण, भीख मांगने के लिए मजबूर करना, सशस्‍त्र गिरोहों में जबरन भर्ती और मजबूरन शादी सहित कई प्रकार से भारत में गुलामी करवाई जाती है।

     उत्तरदाताओं ने स्‍वीकार किया कि उनके या उनके परिवार के अन्‍य सदस्‍य द्वारा लिया गया ऋण चुकाने के लिये उनसे काम कराया जाता है।

     लड़कियों और महिलाओं ने बताया कि तस्कर और वेश्यालय के मालिक उन्‍हें जबरन या झांसा देकर देह व्‍यापार में ढ़केल देते हैं, जिनमें से कईयों को कमरे में बंद कर दिया जाता है और उनके साथ बार-बार दुष्‍कर्म किया जाता है।

  घरेलू नौकरों ने आजादी न होने, लंबे समय तक काम करने, बहुत कम मजदूरी या मेहनताना न मिलने और शारीरिक तथा यौन शोषण की बात कही। भिखारियों ने बताया कि संगठित आपराधिक गिरोह उन्‍हें भीख मांगने को मजबूर करते हैं।

      रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अधिकतर बेटों को प्राथमिकता दी जाती है और इसके लिये अवैध रूप से कन्‍या भ्रूण हत्‍या की जाती है। इसके परिणामस्वरूप देश के कुछ भागों में महिलाओं की संख्‍या कम हो गई है और ऐसे इलाकों में शादी करने के लिए लड़कियों और महिलाओं की तस्करी बढ़ गई है।                                                                                                                                                   

     वैश्विक गुलामी सूचकांक की रिपोर्ट में कहा गया कि “कुछ मामलों में लड़कियों का जबरन विवाह कराया जाता है और उसके बाद बिना कोई मेहनताना दिये उसके साथ मजदूरों जैसा व्‍यवहार किया जाता है। स्थानीय दिहाड़ी मजदूरों को एक फसल के लिए लगभग साढ़े नौ हजार रुपये दिये जाते हैं, लेकिन एक बार करीबन सात हजार रुपये खर्च कर एक दुल्हन हमेशा के लिये खरीदी जा सकती है।”

   अध्‍ययन में पाया गया कि कश्मीर, झारखंड, असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विपक्षी समूहों द्वारा बच्चों को जबरन मुखबिरों के रूप में भर्ती किया जा रहा था या लड़ाई के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा था।    

  “बेहतर सरकारी उपाय”

     सूचकांक में गुलामी की समस्‍या से निपटने में पीड़ितों की मदद, अपराधियों को सजा दिलाने के लिये सशक्‍त न्याय प्रणाली और प्रभावी समन्वय तथा जवाबदेही जैसे सरकार के कदमों के बारे में कहा गया कि भारत ने सुधार के बेहतर उपाय किये हैं।

     सूचकांक में भारत का स्‍थान ऊपर हो गया है और इसमें घरेलू नौकरों के लिये राष्ट्रीय नीति तैयार करने, नया तस्करी रोधी मसौदा विधेयक जारी करने और लापता बच्चों की तलाश के लिये ऑनलाइन मंच शुरू करने की भी सराहना की गई है।

     भारत ने सोमवार को मानव तस्करी रोधी पहला व्‍यापक विधेयक जारी किया, जिसमें पीड़ितों को अधिक से अधिक सुरक्षा देने पर ध्‍यान केंद्रित किया गया है और विशेष अदालतों का प्रावधान है।

  प्रस्तावित विधेयक में पीड़ितों के लिए अधिक आश्रयों के साथ ही दोबारा सामान्‍य जीवन शुरू करने में उनकी मदद के लिये कोष और अपराध साबित करने के लिये विशेष जांच एजेंसी के गठन का भी प्रावधान है।

  डेविड का कहना है कि भारत में आधुनिक समय की गुलामी रोकने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन उन्‍होंने बल देते हुये कहा कि कार्यान्वयन महत्वपूर्ण है।

     उन्‍होंने कहा, “जब तक विधेयक लागू न हो जाय तब तक यह केवल कागज पर लिखे शब्द हैं।”

(रिपोर्टिंग- नीता भल्‍ला, संपादन- केटी नुएन; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। देखें news.trust.org) 

 

 

 

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