भारतीय कारखानों में काम करने वाली महिलाओं ने कार्यस्थ ल पर यौन शोषण के बारे में पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई

by अनुराधा नागराज | @anuranagaraj | Thomson Reuters Foundation
Monday, 31 October 2016 12:36 GMT

An employee works inside a cotton factory at Mauayama town in the northern Indian state of Uttar Pradesh April 13, 2010. REUTERS/Jitendra Prakash

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     डिंडीगुल, 31 अक्टूबर (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – कार्यकर्ताओें का कहना है कि दक्षिण भारत की एक कताई मिल में काम करने वाली छह महिलाओं ने कार्यस्‍थल पर अपने यौन उत्पीड़न के बारे में पत्र लिखकर अरबों डॉलर के वस्त्र उद्योग में फैले महिलाओं के शोषण को उजागर किया और मदद की गुहार लगाई है।

  अपने पुरुष पर्यवेक्षक के व्यवहार के बारे में महिलाओं ने लिखा, "वो हमारे साथ जबरदस्‍ती करता है, लगातार हमें गले लगाता है और हमारी छाती दबाता है।"

   "कोई भी महिलाकर्मी अगर उसकी इन हरकतों का विरोध करती है तो उसका वेतन काट लिया जाता है। हमें इस नौकरी की जरूरत है और हमें नहीं पता कि रोजाना होने वाले इस शोषण के बारे में किससे बात करनी चाहिये। कृपया हमारी मदद करें।"

   कार्यकर्ताओं का कहना है कि तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में समाज कल्याण अधिकारी को भेजे आठ पन्नों के पत्र में शोषण की शिकार महिलाओं ने मदद की अपील की है। यह पत्र 29 अगस्त को लिखा गया था।

   महिला यूनियन-तमिलनाडु टेक्‍सटाइल एंड कॉमन लेबर यूनियन की एस. थिव्‍यराखिनी ने कहा, "आम तौर पर महिलाएं नौकरी छोड़ने के बाद ही अपने शोषण के बारे में बताती हैं।"

  "उनके शोषण के बारे में पहली बार हमें विस्‍तार से ऐसी जानकारी मिली है। इस पत्र से क्षेत्र के वस्त्र उद्योग में हो रहे जघन्‍य शोषण का खुलासा हुआ है।"

    कारखाना प्रबंधन का कहना है कि उन्‍हें ऐसे किसी पत्र की जानकारी नहीं है और उन्‍हें अभी तक कोई औपचारिक शिकायत भी नहीं मिली है।

  राम स्पिनिंग मिल्स के वरिष्ठ प्रबंधक के.आर. शनमुगावेल ने कहा, "लगभग एक साल पहले एक महिलाकर्मी ने उसी व्यक्ति पर निराधार आरोप लगाये थे।"

     "हमने उसे चेतावनी दी थी और आगे की समस्याओं से बचने के लिए उस महिला को भी नौकरी से निकाल दिया था।"

  कार्यकर्ताओं का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े कपड़ा और परिधान निर्माताओं में से एक है। सालाना 40 अरब डॉलर अर्जित करने वाले इस उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों में से कई ऋण बंधन में जकड़े हुये हैं, उनका शोषण होता है या उन्‍हें दयनीय माहौल में लंबे समय तक काम करने को मजबूर किया जाता है।

   आमतौर पर तमिलनाडु के गांवों के लोग कम मजदूरी पर रंगाई इकाइयों, कताई मिलों और परिधान कारखानों में कपास से धागा, कपड़ा और परिधान बनाते हैं, जो अधिकतर पश्चिमी देशों की उच्च स्‍तर की दुकानों के लिए होते हैं।

    दो हज़ार से अधिक इकाइयों में लगभग तीन लाख लोग काम करते हैं। इनमें से ज्यादातर गरीब, अशिक्षित और निम्न जाति या "दलित" समुदायों की युवा महिलाएं होती हैं।

     डिंडीगुल जिले के नल्‍लामनारकोटाई गांव के नजदीक राम स्पिनिंग मिल्‍स में करीबन 100 महिलाएं काम करती हैं।

    पत्र में कहा गया कि "यहां हमेशा अश्‍लील भाषा बोली जाती है और अन्य पुरुष श्रमिकों को भी हमारा यौन शोषण करने के लिये उकसाया जाता है।"

      "कुछ हताश महिलाएं शोषण सहन करती हैं और वे ओवर टाइम करने से बच जाती हैं। लेकिन हम जैसी विरोध करने वाली महिलाओं से जबरन काम पूरा करवाया जाता है। किसी भी प्रकार के विरोध का परिणाम वेतन में कटौती होता है।"

    महिलाओं का कहना है कि वे कारखाना मालिक से अपनी बात नहीं कह पाती हैं, क्‍योंकि वे अन्‍य शहर में रहते हैं और वे जानकारी के लिये प्रबंधक पर विश्‍वास करते हैं।

     महिलाओं ने पत्र में लिखा, "हमें वेतन में कटौती और ओवर टाइम करने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन हम यौन उत्पीड़न बर्दाश्‍त नहीं कर सकते हैं। यह ऐसी समस्‍या है जिसके बारे में हम अपने परिजनों से भी बात नहीं कर पाते हैं। हम रोज भय के साये में काम पर जाते हैं।"

     डिंडीगुल की समाज कल्याण अधिकारी जी. शांति ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया है कि वे आरोपों और कारखाना परिसर में निरीक्षण के लिये जांच समिती गठित कर रहे हैं।

 

(रिपोर्टिंग- अनुराधा नागराज, संपादन- रोस रसल; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। देखें news.trust.org) 

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