भारत सरकार का तस्करी करने वाले गिरोहों पर निशाना

Wednesday, 13 December 2017 13:59 GMT

In this file photo, a homeless girl, covered with a blanket, sleeps on a road divider along a street in Mumbai May 30, 2011. REUTERS/Danish Siddiqui

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मुम्बई, 13 दिसंबर (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)– कार्यकर्ताओं ने बुधवार को कहा कि भारत सरकार नई पहल से यौन तस्‍करों पर निशाना साध रही है। इसके तहत पीडि़ताओं की उनके गांव से लेकर वेश्यालय तक की यात्रा के स्‍थानों को चिन्हित कर इस लाभदायक उद्योग चलाने वाले तस्करों के खिलाफ मजबूत मामला तैयार किया जायेगा।

तस्‍करी के केंद्र पश्चिम बंगाल में अगले सप्‍ताह से तस्करी के धंधे में शामिल शक्तिशाली लोगों के खिलाफ सबूत ढूंढ़ने का कार्य शुरू किया जायेगा। अन्य राज्यों की तुलना में यहां सबसे अधिक तस्‍करी की शिकायतें मिली हैं।

तस्‍करी के खिलाफ अभियान चलाने वालों का कहना है कि लड़कियों को बचाया और वेश्यालय के मालिकों को गिरफ्तार किया जाता है, लेकिन आमतौर पर तस्कर अदालती कार्रवाई से बच जाते हैं।

तस्करी पीडि़ताओं के लिये कार्य करने और इस अध्ययन में सहयोग देने वाली धर्मार्थ संस्‍था- संजोग की कार्यक्रम प्रबंधक पोम्पी बनर्जी ने कहा, "जांच के लिये आवश्‍यक सबूत के वास्‍ते तस्‍कर द्वारा एक लड़की को गांव से लेकर शहर के वेश्‍यालय में बेचने तक के सारे तार जोड़ने पड़ेंगे।"

बनर्जी ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया, "लेकिन अधिकतर वेश्यालय प्रबंधक कहते हैं कि उन्‍होंने लड़की को खरीदा नहीं, बल्कि वह स्‍वयं ही उनके पास आई थी। इसमें तस्कर का कोई जिक्र ही नहीं होता है। हम तस्करों के खिलाफ ऐसे सबूत एकत्रित कर इन्‍हें सरकार के साथ साझा करना चाहते हैं।"

अगले सप्ताह शुरू हो रही पहल के तहत पश्चिम बंगाल में तस्करी के दो बड़े केंद्रों- उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के जिलों में यौन तस्‍करी पीडि़ताओं के लिये कार्य करने वाले नौ गैर सरकारी संगठन बचाये गये लोगों से उनके गांवों से लेकर वेश्यालय तक की यात्रा के बारे में जानकारी लेंगे।

पीडि़ताओं से उनके तस्करों के रंग-रूप और अगर उन्‍हें याद हैं तो उनके पते तथा तस्कर कि गिरफ्तारी हुई थी या नहीं उसके बारे में विस्‍तार से पूछा जाएगा।

पीडि़ताओं से यह भी पूछा जाएगा क्‍या उनकी तस्‍करी करने वाला व्‍यक्ति अन्‍य लड़कियों की तस्करी में भी शामिल था।

बनर्जी ने कहा, "हम पहली बार तस्‍करों की गतिविधियों का इस प्रकार से विवरण तैयार कर रहे हैं। हमारे पास उन तस्करों के खिलाफ इतने वास्तविक साक्ष्य हैं कि उनके द्वारा बेची गई लड़की को बचाकर उसे वापस घर भेजने के बाद भी वे उनकी खरीद-फरोख्‍त करते हैं।"

हाल ही में सरकार द्वारा जारी किये गये आपराधिक आंकड़ों के अनुसार 2016 में मानव तस्करी के 8,132 मामले दर्ज किये गये थे, जबकि 2015 मे यह मामलें 6,877 थे। इनमें से सबसे अधिक शिकायतें पश्चिम बंगाल और उसके बाद राजस्थान में दर्ज की गई थीं।

माना जाता है कि वास्‍तविक आंकड़े इससे काफी अधिक हो सकते हैं।

विश्‍व में सबसे तेजी से मानव तस्‍करी बढ़ने वाले क्षेत्रों में से दक्षिण एशिया एक है और इसका केंद्र भारत है।

देश में कार्य कर रहे गैर-सरकारी संगठनों के अनुसार भारत में लगभग दो करोड़ व्यावसायिक यौनकर्मी हैं और उनमें से एक करोड़ 60 लाख महिलाएं तथा लड़कियां यौन तस्‍करी की शिकार हैं।

सरकारी आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले साल लगभग 11,000 लोगों को मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन करीबन 160 लोगों को ही दोषी ठहराया गया था।

अध्ययनों से पता चलता है कि तस्कर अपना अपराध छुपाने के लिये हमेशा नये-नये तरीके अपनाते हैं।  

अभियानकारों का कहना है कि बचाये गये ज्‍यादातर लोग भय के साये में रहते हैं क्योंकि तस्कर अपने खिलाफ अदालत में चल रहे मामले को वापस लेने के लिये उन्‍हें धमकाते हैं, वे घर छोड़कर भागने या स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।

पीडि़तों का पुर्नवास करवाने वाले एक लाभ-निरपेक्ष संगठन की समन्वयक सुभश्री राप्‍तन ने कहा, "पिछले दो वर्ष में हमें तस्‍करों द्वारा पीडि़ताओं को धमकाने की 100 से अधिक शिकायतें मिली, क्योंकि वे उनके खिलाफ अदालती लड़ाई लड़ रहे थे।"

"हमारे पास कई तस्करों के खिलाफ सबूत हैं, लेकिन इन आंकड़ों को संकलित करने पर पता चलेगा कि तस्कर कैसे अदालती कार्रवाई से बच जाते हैं और अधिकारियों के लिये भी यह चौंकाने वाला तथ्‍य होगा।"

(रिपोर्टिंग- रोली श्रीवास्‍तव, संपादन- लिंडसे ग्रीफिथ; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। देखें news.trust.org)

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