परिधान कर्मियों की मौत की घटनाओं के बाद भारत सरकार उन्‍हें दे रही है परामर्श

by अनुराधा नागराज | @anuranagaraj | Thomson Reuters Foundation
Wednesday, 9 May 2018 13:53 GMT

Employees work inside a garment factory in Mumbai, India, June 1, 2016. REUTERS/Danish Siddiqui

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"There is a lot of stress and trauma inside factories"

चेन्नई, 9 मई (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – एक स्थानीय अधिकारी ने बुधवार को कहा कि दक्षिण भारत में कारखानों और हॉस्‍टलों में कई परिधान कर्मियों की मौत के बाद कार्य के दबाव से लेकर यौन उत्पीड़न की समस्याओं से निपटने में मदद करने के लिए उन्‍हें परामर्श दिया जा रहा है।

सालाना 42 अरब डॉलर के परिधान निर्यात उद्योग में अधिकतर युवा महिलाएं काम करती हैं और वे अपने घरों से दूर हॉस्‍टलों में रहती हैं। उनसे जबरन लंबे समय तक काम करवाया जाता है और उन्‍हें मजबूरन यौन शोषण सहना तथा भद्दी गालियां सुननी पड़ती हैं।

परिधान विनिर्माण केंद्र तमिलनाडु में पिछले तीन महीनों में बीस कर्मियों की मौत हुई है, जिनमें से कई संदिग्ध आत्महत्या के मामले हैं।

सिविल सोसाइटी समूह- सोशल अवेयरनेस एंड वॉलंटरी एजूकेशन के अलॉयसियस अरोकियम ने कहा, "कारखानों के भीतर अत्‍यधिक तनाव और मानसिक बेचैनी का वातावरण है।"

"श्रमिकों से मशीन के समान काम करवाया जाता है और युवा वयस्क काम के दबाव तथा भावनात्मक मुद्दों से जूझते रहते हैं। उनकी मदद करने के लिए उन्‍हें किसी भी प्रकार की सलाह या परामर्श नहीं दिया जाता है और इन परिस्थितियों में उनकी मौत के लिये किसी को भी जवाबदेह नहीं ठहराया जाता है।"

तमिलनाडु टेक्‍सटाइल एंड कॉमन लेबर यूनियन (टीटीसीयू) के अनुसार पिछले महीने 17 वर्षीय एक कताई मिल कर्मी की हॉस्‍टल में हुई मौत पिछले तीन महीनों में डिंडीगुल जिले में ऐसी दसवीं मौत थी।

टीटीसीयू के अध्यक्ष तिव्‍यराखिनी सेसुराज ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया, "उसके परिजनों को संदेह है कि कारखाने में उसका यौन उत्पीड़न कर उसे आत्महत्या करने के लिए उकसाया गया था।"

"इन युवाओं की मृत्‍यु की व्‍यापक जांच नहीं कराई गई है। हमारी मांग है कि वरिष्ठ अधिकारियों से इन मौतों की उचित जांच करवाई जाये।"

कार्यकर्ताओं को तिरुपुर और ईरोड जिलों में 10 और मौत की शिकायतें मिली हैं। "भारत की कपड़ा घाटी" के नाम से प्रसिद्ध अधिकतर परिधान उद्योग इन जिलों में स्थित है।

ईरोड जिले में परिधान कर्मियों के लिये कार्य करने वाली धर्मार्थ संस्‍था- रीड़ के निदेशक कर्रूपु सामी ने कहा, "जिन हॉस्‍टलों में लड़कियां रहती हैं उनका उचित पंजीकरण नहीं है और श्रमिकों की संख्या के बारे में भी कोई दस्‍तावेज नहीं हैं।"

"हमने 2015 से 2017 तक कम से कम 55 मौतों के सबूत जुटाये हैं और ये सभी आत्महत्याएं कारखानों के हॉस्टलों में हुईं थी। ये कभी-कभी होने वाली घटनाएं नहीं हैं।"

डिंडीगुल प्रशासन 200 कताई कारखानों के माहौल में सुधार के लिए जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करेगा, जो एक नयी पहल है।  

प्रशासनिक प्रमुख टी.जी.विनय ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया, "इसका मकसद लड़कियों को उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवाने के लिये सशक्‍त बनाने और कार्य के दबाव से निपटने में उनकी मदद करने तथा उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने का अवसर देना है।"

650 से अधिक कारखानों का प्रतिनिधित्व करने वाले तमिलनाडु स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन ने भी पिछले कुछ महीनों से परामर्श सत्र शुरू किए हैं।

एसोसिएशन के के. वेंकटचलम ने कहा, "सभी मौतें काम की वजह से नहीं हुई हैं, बल्कि कई मामलों में पारिवारिक समस्याओं के चलते लड़कियों ने ऐसे कदम उठाये थे।"

"हम नियोक्‍ता के रूप में अपनी भूमिका से पल्‍ला नहीं झाड़ रहे हैं, बल्कि लड़कियों से बात करने के लिए हाल ही में हमने वरिष्ठ डॉक्टरों को भी आमंत्रित किया था।"

(रिपोर्टिंग- अनुराधा नागराज, संपादन- क्लेयर कोज़ेंस; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। देखें news.trust.org)

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