– नीता भल्ला
नई दिल्ली, 7 जून (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – मानवाधिकारों के हिमायतियों ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को अमेरिका दौरे पर आये भारत के प्रधानमंत्री से कहना चाहिये कि वे अपने देश में तस्करी रोधी कानूनों को मजबूत बनाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने पर बल दें।
ओबामा मंगलवार को व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक कर आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर चर्चा करेंगे।
हालांकि, कार्यकर्ताओं ने ओबामा से 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी की चौथी अमेरिका यात्रा में भारत में गुलामी की रोकथाम की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया है।
वैश्विक गुलामी सूचकांक- 2016 के अनुसार दुनिया में सबसे अधिक गुलाम भारत में हैं, जिनमें से एक करोड़ 80 लाख से ज्यादा लोग ऋण बंधन में जकड़े हुये हैं या उनकी जबरन शादी कर दी जाती हैं, उन्हें वेश्यालयों को बेच दिया जाता है अथवा वे गुलामी के हालात में पैदा होते हैं।
वाशिंगटन के “ह्यूमन राइट्स फर्स्ट” की एमी सोबेल का कहना है, “विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत में अधिक लोग ग़ुलाम है, उनमें से ऋण बंधन में फंसे लाखों भारतीय पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को कड़ी मेहनत करने को मजबूर किया जाता है।“
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा राष्ट्रपति ओबामा के लिये एक अवसर है, जिसमें वे मोदी के साथ आधुनिक समय की गुलामी से निपटने में भारत की प्रगति पर चिंता व्यक्त कर सकते हैं। इसके साथ ही वे यह सुनिश्चित करे कि अमेरिका-भारत संबंध मानव गरिमा और मौलिक अधिकारों के प्रति सम्मान पर आधारित हैं।“
सूची तैयार करने वाले अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार पिछले महीने के वैश्विक गुलामी सूचकांक में 167 देशों में किये गये सर्वेक्षण में पाया गया कि इन सभी देशों में यह समस्या है, लेकिन दुनिया के अनुमानित चार करोड़ 58 लाख दास मे से 40 प्रतिशत भारत में हैं।
अमरीकी विदेश विभाग की व्यक्तियों की तस्करी (ट्रैफिकिंग इन परसन्स- टीआईपी)-2015 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में तस्करी की मुख्य समस्या जबरन मजदूरी है।
अक्सर तस्करों से लिया ऋण चुकाने के लिये महिलाओं और बच्चों सहित कर्ज में दबे पीड़ितों को जबरन ईंट भट्ठों, चावल मिलों, खेतों, कारखानों में कढ़ाई और अन्य उद्योगों में काम करने को मजबूर किया जाता है।
टीआईपी रिपोर्ट ने भारत को टीयर- 2 देश की श्रेणी में रखा है, जिसका मतलब है कि सरकार ने पूरी तरह से अमेरिकी मानकों का पालन नहीं किया है, लेकिन उन मानकों पर खरा उतरने के लिये महत्वपूर्ण प्रयास कर रही है।
पिछले सप्ताह एक वरिष्ठ अमेरीकी सांसद ने भारत में मानवाधिकार की स्थिति पर चिंता जताते हुये कहा था कि टीआईपी की रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि विभिन्न स्तरों के भारतीय अधिकारी मानव तस्करी में सहभागी थे।
अमेरीकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के सदस्य सीनेटर बेन कार्डिन ने नई दिल्ली में अपने संबोधन में कहा, “सरकार ने मानव तस्करी के अपराधों में सहभागी सरकारी अधिकारियों की जांच, मुकदमें या अभियुक्तों के दोषी करार दिये जाने के बारे में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की है।“
हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने पिछले दो साल में मोदी सरकार द्वारा उठाए गए अनेक कदमों के बारे में बताते हुये कहा कि यह सबूत है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।
इनमें नया तस्करी रोधी कानून लाना, लापता बच्चों को खोजने के लिए एक ऑनलाइन मंच की शुरूआत और गुलामी पीडि़त लोगों के पुनर्वास पर अधिक ध्यान देना शामिल है।
पिछले हफ्ते भारत ने पहला व्यापक मानव तस्करी रोधी मसौदा विधेयक जारी किया, जिसमें अधिक आश्रय प्रदान करने, पुनर्वास कोष, मुकदमों की तेजी से सुनवाई के लिये फास्ट ट्रैक अदालतों और अपराध साबित करने के लिये संघीय जांच एजेंसी के गठन का प्रावधान है।
(रिपोर्टिंग- नीता भल्ला, संपादन- केटी नुएन; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। देखें news.trust.org)