– रीना चंद्रन
काठमांडू, 26 जुलाई (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – एक अंतरराष्ट्रीय विकास संगठन का कहना है कि नेपाल में आये दो भूकंप के बाद दोबारा जीवन शुरू करने के लिये पैसा उधार लेने वाले बेघर हुये हजारों नेपालियों का कर्ज चुकाने के लिये उनकी तस्करी किये जाने या गुर्दे बेचने का लालच देने का खतरा बढ़ गया है।
पिछले अप्रैल और मई में आये भूकंप के बाद नेपाल को पुनर्निर्माण के लिए दानदाताओं से लगभग 4.1 अरब डॉलर प्राप्त हुये। हिमालयी राष्ट्र में आये भूकम्प में 9,000 लोग मारे गए, कम से कम 22,000 लोग घायल हो गए और नौ लाख से अधिक मकान क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गये थे।
एशिया फाउंडेशन ने मंगलवार को कहा कि एक साल से भी अधिक बीतने के बावजूद धीमी गति से चल रहे पुनर्निर्माण कार्य में देश के नए संविधान पर अशांति के कारण और देरी हो रही है। काम न मिलने के कारण हजारों नेपाली कर्ज में ढूबे हुये हैं।
काठमांडू में एशिया फाउंडेशन की उप प्रतिनिधि नंदिता बरुआ ने कहा, “उनकी ऋण चुकाने की क्षमता बहुत कम है और इस स्थिति में उनका अधिक शोषण होता है।”
थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को दिये साक्षात्कार में उन्होंने बताया, “हताशा में वे अधिक खतरे उठाते हैं जैसे बेहतर जीवन की चाह में अपने बच्चों को देश से दूर भेजते हैं या अपने गुर्दे तक बेचते हैं।”
बरुआ ने कहा, “आने वाले दिनों में हम देखेंगे कि अपना कर्ज चुकाने के लिये ज्यादा पैसा कमाने के लिये अधिकतर लोग बाहर जायेंगे और उनमें से कुछ लोगों की तस्करी होगी।”
नेपाल की अर्थव्यवस्था प्रवासी मजदूरों द्वारा भेजे जाने वाले धन पर निर्भर है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 30 प्रतिशत है।
भूकंप के बाद सैकड़ों प्रवासी श्रमिक अपने परिजनों की मदद के लिए नेपाल लौट आए हैं।
बरुआ ने कहा कि पुनर्निर्माण के खर्च के बावजूद घर लौटने के लिये कई लोगों ने अपने मालिकों के यहां कई महीने मजदूरी के बगैर भी काम किया।
उन्होंने उन्होंने बताया, “ये श्रमिक विदेश जाने के लिए दो से पांच लाख नेपाली रुपये देते हैं और बाद में भी उस कर्ज को चुकाते रहते हैं।”
उन्होंने कहा, “भूकंप से उनकी ऋणग्रस्तता की स्थिति विकट हो गई है।”