रोली श्रीवास्‍तव

मुंबई, 9 अगस्त (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)- एक टेलीविज़न धारावाहिक के खिलाफ भारतीय दर्शकों में आक्रोश है। इसमें एक दस साल के लड़के का विवाह 19 साल की महिला से दिखाया गया है, इसलिये दर्शक चाहते हैं कि इस पर प्रतिबंध लगे। उनका कहना है कि इस “विचित्र शो”में बाल विवाह का महिमा मंडन किया जा रहा है।

भारत के लोकप्रिय हिंदी मनोरंजन चैनल-सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर पिछले महीने
धारावाहिक पहरेदार पिया की; शुरू हुआ, जिसे सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना रात साढ़े आठ
बजे प्रसारित किया जाता है।

change.org पर एक ऑन लाइन याचिका द्वारा सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी से इस
धारावाहिक पर प्रतिबंध लगाने का निवेदन किया गया है। शुरू होने से मात्र 48 घंटे में इस याचिका
पर लगभग 50,000 हस्ताक्षर हो चुके थे।

याचिकाकर्ता मानसी जैन ने इस धारावाहिक का दर्शकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर प्रश्‍न उठाया है।
जैन का कहना है कि धारावाहिक में एक बच्‍चे को उसकी पत्नी की भूमिका निभाने वाली उससे
बड़ी उम्र की अभिनेत्री की मांग में सिंदूर भरने जैसी विवाह की कई रस्‍में करते हुये दिखाया
गया है।

टाटा सामाजिक विज्ञान संस्‍थान में कानून की प्रोफेसर आशा बाजपेई ने थॉमसन रॉयटर्स
फाउंडेशन को बताया, "यह धारावाहिक बाल विवाह को प्रोत्साहित, महिमामंडित और बढ़ावा दे रहा
है, जिसका पूरे समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।”
“पति की भूमिका निभाने वाले 10 साल के लड़के का क्या होगा? छाप छोड़ने वाली इस छोटी उम्र
में हम उसे क्‍या मूल्‍य सिखा रहे हैं?”

भारत में महिलाओं के विवाह की कानूनी उम्र 18 वर्ष और पुरुषों की 21 साल है। लेकिन बाल
विवाह, जो अवैध है, अभी भी देश के कुछ हिस्सों में व्यापक रूप से प्रचलित है।

इस अपराध के खिलाफ कड़ी सजा के प्रावधान के बावजूद नाइजर, गिनी, दक्षिण सूडान, चाड और

बुरकीना फासो के साथ ही भारत में भी बाल विवाह की दर विश्‍व में सबसे अधिक है।
अपने नाबालिग बच्चों का विवाह करवाते हुये पकड़े जाने पर माता-पिता से बाल विवाह निषेध
अधिनियम के तहत दस हजार रुपये का जुर्माना लेने और दो साल जेल की सजा का प्रावधान है।
भारत सरकार बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे
धारावाहिक इन कार्रवाइयों में बाधा बन सकते हैं।

धारावाहिक के कलाकरों ने सोशल मीडिया पर कहानी का पक्ष लेते हुये कहा है कि इसका मकसद
शुद्ध मनोरंजन करना है और यह बाल विवाह को कतई बढ़ावा नहीं देता है।

सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के अधिकारी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिये उपलब्‍ध नहीं थे।
हालांकि अपनी वेबसाइट पर सोनी ने ऐसे कई और दिलचस्प नाटक टेलीविजन पर दिखाये जाने का
दावा किया है।

“हम प्रासंगिक, आकर्षक और मनोरंजक कहानियों को विवेकपूर्ण तरीके से बताने के अंदाज में हम
सबसे आगे रहते हैं।”

(रिपोर्टिंग-रोली श्रीवास्‍तव, संपादन- लिंडसे ग्रीफिथ; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा,
थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी,
भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। देखें news.trust.org)

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Women's rights