लंदन, 31 मई (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – 15 भारतीय यौन कर्मियों की बेटियों को आशा है कि जब वे दुनिया के सबसे बड़े ग्रीष्‍म कला महोत्सव में आधुनिक समय के गुलामों की खरीद-फरोख्‍त के अपने अनुभव को नाटक के तौर पर पेश करेंगी तो मानव तस्करी के बारे में लोगों की धारणाएं बदल जायेगी।  

उनके नाटक लाल बत्‍ती एक्सप्रेस का उद्देश्य एडिनबर्ग फ्रिंज महोत्‍सव में उन दर्शकों तक पंहुचना है, जिन्‍हें यौन कर्म और आज के समय के वैश्विक मानव खरीद-फरोख्‍त के बारे में बहुत कम जानकारी है।

उन्हें उम्मीद है कि दे‍ह व्‍यापार के उद्योग में तस्करी और पारिवारिक अंतर्दृष्टि के उनके नीजि अनुभवों को मंचित करने से आम तौर पर  उनकी माताएं जो लांछन सहती हैं उसे कम करने में मदद मिलेगी।

इन लड़कियों की सहायता करने वाली धर्मार्थ संस्‍था- क्रांति के निदेशक रॉबिन चौरसिया ने कहा,”थिएटर के माध्यम से लड़कियों की आवाज उठना, उनमें आत्‍म विश्वास जगना और उनके व्यक्तित्‍व में निखार आते देखना एक अद्भुत अनुभव है।”

उन्होंने कहा, “लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्‍हें इतने लोगों तक पंहुचते और उनकी सोच में बदलाव लाते देखना काफी प्रेरणादायक है।”

13 से 22 साल की सभी कलाकार मुम्बई के रेड लाइट जिले की यौन कर्मियों और तस्करी पीडि़ताओं की बेटियां हैं। वे क्रांति स्कूल में पढ़ती हैं, जो मुम्बई के रेड लाइट जिले कमाठीपुरा इलाके में यौन कर्मियों और मानव तस्करी पीड़िताओं की बेटियों की सहायता के लिए स्थापित किया गया था।

यह मंड़ली आगामी अगस्त में दुनिया के सबसे बड़े कला महोत्सव- स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग फ्रिंज महोत्‍सव  में अपना नाटक प्रस्‍तुत करेगी।

कलाकार संध्या नायर ने एक बयान में कहा, “मैंने पाया कि थिएटर घाव भरने का एक तरीका हो सकता है। दर्शकों के साथ अपनी गाथा साझा करने से काफी राहत की अनुभूति होती है, क्‍योंकि वे आलोचना और भेदभाव करने की बजाय प्रोत्‍साहन देते और सराहना करते हैं।”

क्रांति के पाठ्यक्रम में गणित से लेकर ध्यान तक सब कुछ शामिल है। संस्‍था जिन “क्रांतिकारियों” को प्रशिक्षित करती है, उन्‍हें शिक्षक और सामुदायिक नेता बनने के लिेये प्रोत्साहित किया जाता है।

तस्करी की गई सबसे अधिक महिलाओं और बच्चों को मुंबई में लाया जाता है। अधिकतर को अन्य राज्यों और नेपाल तथा बांग्लादेश सहित पड़ोसी देशों से घर या दुकान में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि लेकिन इसके बजाय कईयों को देह व्‍यापार में ढ़केल दिया जाता है या उनसे जबरन मजदूरी करवाई जाती है। बार-बार पुलिस कार्रवाई के बाद यह कारोबार दबे छुपे करने के कारण शहर के यौन कर्मियों को लांछन झेलना पड़ता है और उनके साथ हिंसा का खतरा बना रहता है।

(रिपोर्टिंग- अन्‍ना पुजोल-माजि़नी, संपादन- लिंडसे ग्रीफिथ; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। देखें news.trust.org)

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