नई दिल्ली, 11 दिसम्बर (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – वंचित बच्चों की समस्याओं के बारे में सुविधा संपन्न बच्चों को जागरूक बनाने का वैश्विक अभियान शुरू करने के लिये हजारों बच्चे रविवार को राष्ट्रपति भवन में एकत्रित हुये।
इस अभियान का उद्देश्य मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से वंचित बच्चों के कल्याण के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इन बच्चों की दयनीय स्थिती में सुधार के लिए सरकारों और अंतरराष्ट्रीय समुदायों में याचिका दायर करने के लिये युवाओं को प्रोत्साहित करना है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और हॉलैंड की राजकुमारी लॉरेंटिन जैसे प्रमुख नेताओं तथा भारत, यमन और ट्यूनीशिया के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नेतृत्व में तीन हजार से अधिक बच्चों ने “10 करोड़ के लिए 10 करोड़” अभियान के शुभारम्भ के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में जुलूस निकाला।
मुखर्जी ने इस अभियान को बच्चों के अधिकारों के लिये “लंबे समय से अपेक्षित” प्रयास की शुरुआत बताया।
मुखर्जी ने कहा, “विश्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास और अन्य क्षेत्रों में प्रगति के बावजूद अभी भी दस करोड़ से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं और बचपन की मौज मस्ती की जगह कई तरीकों से उनका शोषण होता है।”
“मानव जाति को बिना देरी किये यह समझना होगा कि जब तक हमारे बच्चे सुरक्षित और सकुशल नहीं हैं, जब तक उन्हें स्वतंत्रता नहीं है और जब तक उनके पास मानवता की भलाई के लिए बड़े परिवर्तन का एजेंट बनने का अवसर नहीं है तब तक प्रगति नहीं हो सकती है।”
संयुक्त राष्ट्र की बाल अधिकार एजेंसी-यूनिसेफ के अनुसार कई बच्चे दयनीय स्थिती में जीते और मरते हैं। अकेले 2015 में ही साधारण बीमारियों के कारण 5 साल की उम्र से पहले ही लगभग 60 लाख बच्चों की मृत्यु हुई है।
अन्य लाखों बच्चों को सिर्फ इसलिए शिक्षा नहीं मिल रही है, क्योंकि उनके माता-पिता गरीब हैं, क्योंकि वे लड़कियां हैं या क्योंकि वे सीरिया, यमन और इराक जैसे संघर्षरत देशों में रह रहे हैं।
यूनिसेफ का कहना है कि हालांकि विश्व स्तर पर गरीबी कम हो रही है, लेकिन दुनिया की सबसे गरीब आबादी में से लगभग आधी आबादी बच्चों की है और इन गरीब बच्चों का शोषण आसानी से किया जा सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार विश्व के 16 करोड़ 80 लाख बाल श्रमिकों में से 55 लाख बच्चे दासता में पैदा हुये, वेश्यावृत्ति के लिए तस्करी किये गये या ऋण बंधन में फंसे हुये अथवा जबरन मजदूरी करने को मजबूर हैं।
दो दिन के सम्मेलन के बाद इस अभियान का शुभारम्भ किया गया। सम्मेलन में दलाई लामा, पूर्वी तिमोर के पूर्व राष्ट्रपति जोस रामोस होर्ता तथा आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के महासचिव एंजेल गुरिया सहित विश्व के नेताओं और नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने बच्चों का शोषण समाप्त करने के लिये ठोस कार्रवाई करने का संकल्प लिया।
पांच साल चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य विश्वविद्यालयों, स्कूलों, शिक्षकों और छात्र समूहों के साथ काम करके युवाओं के उत्साह और सहानुभूति का उपयोग कर वंचित बच्चों की चुनौतियों के बारे में जागरूकता फैलाना है।
बाल अधिकार कार्यकर्ता और नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने इसे “सहानुभूति का वैश्वीकरण” करार दिया है। सत्यार्थी ने इस सम्मेलन और अभियान का आयोजन किया था।
उन्होंने कहा, “हम एक ऐसी नई सभ्यता, नया विश्व बनाना चाहते हैं, जहां दस करोड़ वंचित बच्चे और दस करोड़ सुविधा संपन्न बच्चे दो अलग अलग दिशाओं में ना जायें। हम दुनिया भर में अधिक समानता लाना चाहते हैं।”
“दस करोड़ सुविधा संपन्न बच्चे दस करोड़ वंचित बच्चों के कल्याण की बात करेंगे।”
जुलूस में शामिल बच्चों ने सफेद टी-शर्ट और बेसबॉल कैप पहनी हुई थी और वे झंडे लहरा रहे थे, जिसपर लिखा था- “बच्चों के प्रति अपना कर्तव्य निभायें।”
दक्षिण दिल्ली में रहने वाली 12 साल की सविता ने कहा, “मुझे लगता है कि यह एक अच्छा विचार है। हमसे कई अधिक गरीब बच्चे हैं। रोजाना स्कूल जाते समय हम उन्हें गलियों और सड़कों पर देखते हैं। यह उचित नहीं है।”
(रिपोर्टिंग- नीता भल्ला, संपादन-एलन वुल्फोर्स्ट; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। देखें news.trust.org)