नई दिल्ली, 15 मार्च (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – श्रम मंत्री ने कहा है कि देश में 14 वर्ष या उससे कम उम्र के बाल श्रमिकों की संख्या 2011 में घट कर 45 लाख हो गई है, जो एक दशक पहले तक 1 करोड़ 26 लाख थी। उन्होंने सांसदों से बाल श्रमिकों की समस्या पर काबू पाने के लिए मौजूदा कानून में परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी देने का आग्रह करते हुये यह बात कही।
श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने सोमवार को लोक सभा में बताया कि सरकार तीन दशक पुराने बाल श्रम निषेध कानून में संशोधन करने वाली है। उन्होंने संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से इसे पारित कराने में समर्थन देने का आग्रह किया।
दत्तात्रेय ने कहा, “मैंने शीतकालीन सत्र में इसके लिये अधिसूचना दी थी, लेकिन यह पारित नहीं हो सका। हालांकि इस सत्र में भी मैंने अधिसूचना दी, लेकिन यह पारित नहीं हो पाया है।”
वर्तमान कानून में संशोधन 8 मई को समाप्त होने वाले संसद के इसी सत्र में प्रस्तुत किया जाना है। 21 मार्च से 19 अप्रैल तक इस सत्र में अवकाश है।
दत्तात्रेय ने 2011 की जनगणना के आंकड़ें देते हुये बताया कि 10 वर्षों में देश में बाल श्रमिकों की संख्या 64 प्रतिशत घटी है।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की फ़रवरी 2015 की रिपोर्ट के अनुसार विश्व के 5 से 17 वर्ष की आयु के 16 करोड़ 80 लाख बाल श्रमिकों में से 5 से 57 लाख बाल श्रमिक भारत में हैं।
आधे से अधिक बाल श्रमिक कपास, गन्ने और धान के खेतों में कड़ी मेहनत करते हैं, जहां उनके लिए कीटनाशक और नुकीले तथा भारी उपकरणों से घायल होने का जोखिम होता है।
कम से कम एक चौथाई बाल श्रमिक निर्माण क्षेत्र में काम करते हैं और वह अकसर अंधेरे कमरों में कपड़ों पर कशीदाकारी, कालीन बुनने, दीया सलाई या बीड़ी सिगरेट बनाने का काम करते हैं। कई बाल मजदूर ईंट भट्ठों और खदानों में अपने माता-पिता की मदद करते हैं।
बच्चे सेवा क्षेत्र में भी कार्य करते हैं। वे दुकानों, रेस्तरां और होटलों में बर्तन धोने और सब्जी काटने या मध्यम वर्गीय घरों में सफाई और छोटे बच्चों की देखभाल का काम करते हैं।
सरकार वर्तमान कानून में परिवर्तन करना चाहती है, जिसके तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर केवल 18 खतरनाक कारोबार और खनन, कीमती नगों को तराशने और सीमेंट निर्माण जैसी 65 इकाईयों में काम करने पर प्रतिबंध है।
अगर संसद में नया कानून पारित हो जाता है तो परिवर्तित कानून में 15 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए नई श्रेणी सहित सभी क्षेत्रों में 14 वर्ष के कम आयु के बच्चों से काम करवाना गैर कानूनी होगा।
इस संशोधन के तहत बच्चों से काम करवाने पर अधिकतम दो वर्ष की जेल होगी और जुर्माना वर्तमान 20 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया जाएगा।
लेकिन नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी सहित बाल अधिकार के हिमायतियों ने दो अपवादों पर चिंता जताई है।
यह अपवाद हैं- अपने पारिवारिक कारोबार में परिवार की मदद के लिए बच्चे स्कूल के अलावा और छुट्टियों में काम कर सकते हैं। इसके अलावा खेल तथा मनोरंजन उद्योग से जुड़े बच्चे अपनी शिक्षा के साथ-साथ काम कर सकते हैं।
15 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों पर केवल तीन उद्योगों- खनन, ज्वलनशील पदार्थों और खतरनाक इकाईयों में काम करने पर प्रतिबंध होगा।
धर्मार्थ संस्था- बचपन बचाओ आंदोलन के सत्यार्थी ने कहा कि छूट ‘प्रतिगामी’ है और वे सभी प्रकार के बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध चाहते हैं। बचपन बचाओ आंदोलन ने 80 हजार से अधिक बाल श्रमिकों को बचाया है।
(रिपोर्टिंग- नीता भल्ला, संपादन – एलिसा। कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। और समाचारों के लिये देखें http://news.trust.org)