नई दिल्ली, 10 नवम्बर (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने भ्रष्टाचार और नकली मुद्रा पर नियंत्रण के लिए रातों-रात 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बंद करने के भारत के कदम का स्वागत करते हुये कहा है कि इससे मानव तस्करी और बच्चों की गुलामी रोकने में भी मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों द्वारा अरबों रुपये के बेहिसाब धन या “काले धन” की जमाखोरी को मुख्य अर्थव्यवस्था में शामिल करने और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिये, मंगलवार को अचानक इन नोटों को बंद करने की घोषणा की।
मंगलवार को आधी रात से उच्चतम मूल्य के नोट कानूनन अमान्य होंगे और इनके स्थान पर बैंकों से छोटे नोट लिये जा सकते हैं।
बैंकों में अगर असामान्य रूप से बड़ी रकम जमा होने के लिये आती है तो उन्हें इस बारे में भारतीय रिजर्व बैंक और कर अधिकारियों को सचेत करना होगा, क्योंकि हो सकता है कि वह धन बेईमानी से एकत्रित किया गया हो।
बाल अधिकार कार्यकर्ता सत्यार्थी ने कहा कि मानव तस्करी और बाल मजदूरी काले धन के बड़े स्रोतों में से एक हैं।
उन्होंने देर बुधवार को जारी एक बयान में कहा, “मैं काले धन और भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए साहसिक कदम की सराहना करता हूं।”
“तस्करों और गुलामों के मालिकों द्वारा कमाया गया एक-एक रुपया काला धन है। इस कदम से उनकी कमर टूट जायेगी।”
ऑस्ट्रेलिया के वॉक फ्री फाउंडेशन के 2016 के वैश्विक गुलामी सूचकांक के अनुसार दुनिया के 4 करोड़ 58 लाख गुलामों में से अकेले भारत में चालीस प्रतिशत गुलाम हैं।
गिरोह हर साल ज्यादातर गरीब ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों बच्चों को शहरों में ले जाकर उन्हें बंधुआ मजदूरी करने के लिये बेच देते हैं या बेईमान मालिकों के पास काम पर रख देते हैं।
इनमें से कई घरेलू नौकर के तौर पर काम करते हैं या ईंट भट्ठों में मजदूरी करते हैं, सड़क के किनारे रेस्तरां या वस्त्र और कढ़ाई करने की छोटी इकाइयों में काम करते हैं। कई महिलाओं और लड़कियों को वेश्यालयों में बेच दिया जाता है।
2014 में मोदी के कार्यभार सम्भालने के बाद उन्होंने आभासी अर्थव्यवस्था के खिलाफ संघर्ष का वादा किया था, जिसके लिये उन्हें उन मध्यवर्गीय भारतीयों का समर्थन मिला। उनका आरोप था कि राजनेता और व्यवसायी व्यवस्था की आंखों में धूल झोंकते हैं।
बगैर चेतावनी के 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बंद कर दिया गया है। आतंकी घटनाओं के लिये नकली नोटों का उपयोग करने वाले भारत विरोधी आतंकवादियों को रोकने में भी यह कदम सार्थक होगा।
80,000 से अधिक गुलाम बच्चों को मुक्त कराने वाली संस्था- बचपन बचाओ आंदोलन के सत्यार्थी ने कहा कि बच्चों की खरीद फरोख्त से अवैध तरीके से अरबों रुपये कमाये जाते हैं।
उन्होंने कहा, “मैंने ऐसी अनगिनत घटनाएं देखी हैं, जहां एजेंट या दलाल युवा लड़कों को बंधुआ मजदूरी पर रखवाने का 5,000 रुपये और वेश्यावृत्ति तथा बाल विवाह के लिए लड़कियों को बेचने के मामलों में वे लगभग दो लाख रुपये लेते हैं।”
2014 में पाकिस्तानी छात्रा मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित सत्यार्थी ने कहा, “यह घोषणा बच्चों के शोषण और भ्रष्टाचार के खिलाफ संगठित तरीके से लड़ाई में मील का पत्थर साबित होगी। भविष्य की पीढ़ी के लिए अधिक समृद्ध भारत बनाने की दिशा में यह सकारात्मक कदम है।”
(रिपोर्टिंग- नीता भल्ला, संपादन-केटी नुएन; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। देखें news.trust.org)