चेन्नई, 22 सितम्बर (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – श्रमिकों के लिये “सम्मानजनक नीति” की मांग कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि आंध्र प्रदेश में नई राजधानी के निर्माण कार्य के लिये प्रवासी श्रमिकों की मांग बढ़ने के साथ ही हजारों गरीब श्रमिकों के ऋण बंधन का खतरा भी बढ़ जायेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2015 में कृष्णा नदी के तट पर अमरावती का शिलान्यास किया था।
निर्माण स्थल पर कार्य पहले से ही शुरू हो चुका है, जहां 5,558 हेक्टेयर में वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्र जबकि 8,050 हेक्टेयर में आवासीय क्षेत्र विकसित किये जायेंगे।
अभियान समूह-ऐड एत एक्शन से जुड़े प्रवासी अधिकार कार्यकर्ता उमी डैनियल ने कहा, “देश के सबसे गरीब जिलों से श्रमिक इस आधुनिक शहर के निर्माण के लिए आयेंगे।”
डैनियल ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया, “नए शहर की परियोजना रिपोर्ट में धन के व्यय और बड़े-बड़े विचारों पर चर्चा की गई है, लेकिन इसका निर्माण करने वाले लोगों के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।”
कार्यकर्ताओं का कहना है कि देश के समृद्ध निर्माण उद्योग के लिये हर साल ईंट भट्ठों में काम करने के वास्ते हजारों मजदूरों की तस्करी की जाती है।
आमतौर पर देश के पूर्वी राज्य ओडिशा से हजारों गरीब मजदूर हर साल आंध्र प्रदेश के ईंट भट्टों में काम करने आते हैं, जहां वे ज्यादातर हाथ से ही ईंटे बनाते और उन्हें पकाते हैं।
इन श्रमिकों में से कईयों को उनके द्वारा लिये गये ऋण या उनके पुश्तैनी ऋण की जमानत के तौर पर काम करने को कहा जाता है।
आंध्र प्रदेश में श्रमिक अधिकार संरक्षण का आह्वान करने वाले कार्यकर्ता अमरावती के निर्माण में लगे मजदूरों के लिये रहने के स्वच्छ स्थान, कार्य स्थल पर सुरक्षित वातावरण और गारंटीड मजदूरी की मांग कर रहे हैं।
कार्यकर्ताओं ने बताया कि कई ईंट भट्ठा मालिकों ने निर्माण कार्य में आई इस तेजी का लाभ उठाने के लिये नए शहर के निर्माण स्थल पर ही अपना कार्य शुरू कर दिया है।
श्रम अधिकारी रामचंद्र मूर्ति ने कहा, “किसी भी प्रकार का शोषण न हो यह सुनिश्चित करने के लिये श्रम निरीक्षकों सहित विशेष अधिकारी नियुक्त किये गये हैं और अंतरराज्यीय प्रवासी कामगार अधिनियम लागू किया जाएगा।”
2014 में आंध्र प्रदेश के दो राज्यों-आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विभाजन के बाद नई राजधानी बनाने की आवश्यकता पड़ी।
वर्तमान में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की संयुक्त राजधानी हैदराबाद है।
पहली बार अमरावती के निर्माण में लोगों से निवेश आमंत्रित करने के लिये “ए ब्रिक्स इनिशिएटिव” बनाया गया है, जिसके तहत शहर निर्माण में लगने वाली ईंटों का मूल्य लोग देंगे।
आज तक 226,289 लोगों ने पचास लाख से अधिक ईंटें दान की हैं।
(रिपोर्टिंग-अनुराधा नागराज, संपादन-केटी नुएन; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। देखें news.trust.org)