- रीना चंद्रन
मुंबई, 1 जुलाई (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – 251 रुपये का स्मार्टफोन बनाने वाले भारतीय निर्माताओं को उम्मीद है कि इसकी कम कीमत की वजह से सबसे गरीब लाखों लोग मोबाइल फोन के उपभोक्ता बन जायेंगे। अभी भारत में केवल 10 प्रतिशत लोगों के पास मोबाइल फोन है।
लेकिन श्रम अधिकारों के हिमायतियों को चिंता है कि सस्ते हैंडसेट और टेबलेट को बढ़ावा देने से भारत में मजदूरों के अधिकारों का अधिक हनन होगा, जो दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता स्मार्टफोन का बाजार है।
रिंगिग बेल्स कंपनी का फ्रीडम 251 स्मार्टफोन संभवतः दुनिया में सबसे सस्ता एंड्रॉयड स्मार्टफोन है, जिसकी कीमत 251 रुपये है। फरवरी में इस फोन के शुभारंभ के मौके पर खरीदारों की भीड़ से कंपनी की वेबसाइट बैठ गई थी।
गुरुवार को कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहित गोयल ने बताया कि अगले हफ्ते करीबन दो लाख हैंडसेट की पहली खेप बाजार में लाई जायेगी।
उन्होंने कहा कि रिगिंग बेल्स अपने कर्मियों को उचित मेहनताना देती है और इसके महंगे मॉडलों से 251 रुपये के इस फोन की लागत निकालने में मदद मिलेगी।
गोयल ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया, “हम उन लाखों गरीब भारतीयों के लिए किफायती मोबाइल फोन बनाना चाहते हैं, जिनके पास फोन नहीं है।”
भारत में पिछले साल 10 करोड़ 30 लाख हैंडसेट बिके, जो पिछले एक साल की बिक्री से 29 प्रतिशत अधिक है।
प्रत्येक 10 भारतीयों में से केवल एक के पास मोबाइल फोन है, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में अपार अवसर है, विशेषरूप से बाजार के निचले वर्ग में जहां दर्जनों स्थानीय और विदेशी ब्रांड ग्राहकों को लुभाने की होड़ में लगे हैं। कुछ ब्रांड 1,700 रुपये से भी कम कीमत में हैंडसेट बेच रहे हैं।
हालांकि, कार्यकर्ताओं का कहना है कि लागत कम रखने के लिए निर्माता श्रमिकों को कम मजदूरी देते हैं, उनसे सस्ते श्रम अनुबंध करते हैं तथा बिना मेहनताना दिये ओवरटाइम करवाने पर जोर देते हैं।
मजदूरों के अधिकारों के हिमायती समूह सीवीडेप के महासचिव गोपीनाथ पाराकुनी ने बताया, “आपूर्ति श्रृंखला और कर्मियों के प्रति जवाबदेही ब्रांड कंपनियों की होती है।”
उन्होंने कहा, “हमारे नियम इतने सख्त नहीं हैं कि इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में श्रमिकों का कल्याण सुनिश्चित किया जा सके।”
“इसकी कीमत कौन चुकाता है?“
पिछले महीने सीवीडेप और एम्स्टर्डम की गुडइलैक्ट्रॉनिक्स कंपनी ने भारत के मोबाइल बाजार की प्रमुख कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स पर एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें पाया गया कि सैमसंग कर्मियों को बहुत कम मेहनताना दिया जाता है और उनकी शिकायतों की सुनवाई का कोई प्रभावी तरीका भी नहीं है।
सैमसंग इंडिया के एक प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी के संचालनों में सभी संबंद्ध श्रम कानूनों और नियमों का पालन किया जाता है।
प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “निष्पक्षता और सभी के लिए सम्मान हमारे व्यापार की नींव है।”
मोटे तौर पर चीन और ताइवान से आयात करने वाली भारत की करीब 100 फोन कंपनियां चीन के निर्यात की बराबरी करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में शुरू की गई पहल “मेक इन इंडिया” पर अधिक ध्यान दे रही हैं।
चीन की फोन निर्माता कंपनी शिओमी ने पिछले साल आंध्र प्रदेश के एक केंद्र से स्थानीय स्तर पर बने अपने पहले स्मार्टफोन लांच किये।
“मेक इन इंडिया” अभियान का उद्देश्य अधिक निवेश आकर्षित करना, आर्थिक विकास बढ़ाना और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा परिधान जैसे उद्योगों में रोजगार सृजन कर विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि इन प्रयासों में लाखों कर्मियों के लिये पर्याप्त नियंत्रण और संतुलन की कमी है, जिसके कारण कर्मी पुराने श्रम कानूनों के अंतर्गत, कम मजदूरी, कुछेक लाभ और रोजगार सुरक्षा के बगैर काम करते हैं। अक्सर सुरक्षा या कम उम्र के कर्मियों के मामले में श्रम कानूनों का भी उल्लंघन किया जाता है।
हांगकांग की श्रम अधिकारों की हिमायती लाभ निरपेक्ष संस्था- एशिया मॉनिटर रिसोर्स सेंटर की 2013 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में काम करने का माहौल सबसे खराब माहौल मे से एक है।
सस्ते इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के सभी प्रयास सफल नहीं रहे हैं। 2008 में भारत सरकार ने लगभग 700 रुपये में लैपटॉप देने की घोषणा की थी, जिसकी बाद में कीमत 7000 रुपये के करीबन आई और 1500 रुपये की एंड्रॉयड सब्सिडी योजना के माध्यम से बेचे गये टेबलेट बाजार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल करने में विफल रहे।
नई दिल्ली में सेंटर फॉर रिस्पोंसिबल बिजनेस के राफेल जोस ने कहा, “कंपनियों का कहना हैं कि सस्ते फोन और कंप्यूटर डिजिटल सशक्तिकरण और लोकतंत्र का परिणाम हैं।”
उन्होंने कहा, “लेकिन हमें यह पूछना चाहिए कि ‘इन सस्ते उपकरणों की असली कीमत क्या है? कौन इनका मूल्य चुकाता है?’ सस्ता हमेशा अच्छा नहीं होता है।”
(रिपोर्टिंग-रीना चंद्रन, संपादन-केटी नुएन; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। और समाचारों के लिये देखें http://news.trust.org)