• नीता भल्ला

     नई दिल्ली, 30 जून (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सिगरेट कंपनी-ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको (बैट) ने गुरुवार को बांग्लादेश में इसकी आपूर्ति करने वाले खेतों की जांच करने का बीडा उठाया है। स्वीडन के अभियान चलाने वाले एक समूह द्वारा तंबाकू उगाने और उसकी प्रक्रिया में बाल श्रमिकों से काम कराये जाने का खुलासा करने के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया है।

  बांग्लादेश में तंबाकू की खेती करने वाले तीन जिलों का सर्वेक्षण करने वाली स्‍वेडवाच का कहना है कि उन्‍होंने पाया कि बैट और उसकी स्थानीय सहायक कंपनी ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको बांग्लादेश को आपूर्ति करने वाले खेतों में “बड़े पैमाने पर” बच्‍चों से काम कराया जाता था, जिसका उनके स्वास्थ्य और शिक्षा पर बुरा असर पड़ा।

  जुलाई 2015 से मई 2016 के बीच किये गये अध्ययन में कहा गया कि, “हर उम्र की लड़कियां और लड़के सिंचाई और खेतों को समतल करने का काम करते हैं। उनमें से कुछ बच्‍चे भार उठाते और क्‍यारियों से पौधे खेतों में लाते हैं।”

  “कटाई के बाद, वे तने और पत्ते तोड़ते हैं और संसाधन के समय वे भट्ठे के तापमान का ध्‍यान भी रखते हैं।”

   स्‍वेडवाच का कहना है कि फसल कटाई के दौरान बच्चों को ना केवल स्कूल से निकाल कर उनसे दिन में 16- 16 घंटे काम करवाया जाता है, बल्कि तंबाकू के हरे पौधों, तंबाकू की धूल और तंबाकू सुखाने के भट्ठे से निकलते धु़ंएं के बीच उन्‍हें काम करना पड़ता है।

  ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको में कारपोरेट मामलों के समूह प्रमुख साइमन क्‍लेवरली ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया कि कंपनी ने किसानों को दिये गये अनुचित ठेके के आरोपों सहित रिपोर्ट के निष्कर्षों की जांच की, लेकिन किसी भी प्रकार के मानवाधिकार के उल्लंघन का कोई सबूत नहीं मिला है।

  उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में तंबाकू की पैदावार और ग्रामीण आजीविका पर गौर करने के लिए बैट द्वारा अधिकृत कई स्वतंत्र अध्‍ययनों से यह पाया गया कि कंपनी का सकारात्मक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव है।

  क्‍लेवरली ने कहा कि लकी स्ट्राइक और डनहील सिगरेट के निर्माता-बैट ने स्‍वेडवाच से बच्चों से काम करवाने वाले खेतों के बारे में विस्‍तृत जानकारी देने को कहा है, ताकि कंपनी आगे की जांच कर सके और आवश्यक हुआ तो कार्रवाई भी कर सके।

     क्‍लेवरली ने कहा, “हमारा मानना है कि इस रिपोर्ट में बांग्लादेश में तंबाकू पत्ती की खेती की हमारी आपूर्ति श्रृंखला के बारे में भ्रामक और गलत तथ्‍य पेश किये गये हैं। हम लम्‍बे समय से पारस्परिक लाभ के लिए बांग्लादेश के किसानों और सरकार के साथ काम कर रहे हैं।”

  “मुझे कमजोरी महसूस होती है”

     अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार बांग्लादेश में 5 और 17 साल की आयु के 50 लाख से अधिक बच्चे किसी न किसी प्रकार के रोजगार से जुड़े हुए हैं।

     हालांकि बांग्लादेश के कानून के अंर्तगत काम करने की न्यूनतम उम्र 14 वर्ष निर्धारित की गई है, लेकिन गरीबी के कारण कई परिवार अपने बच्चों को काम करने के लिए भेजते हैं।

  यूनिसेफ का अनुमान है कि 93 प्रतिशत बाल श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं, जिससे श्रम कानूनों का अमल लगभग असंभव हो जाता है।

   काम करने वाले बच्चों में से करीब आधे कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं, जहां काम के दौरान मौत और तेज उपकरण, खतरनाक मशीनरी, और कृषि रसायनों के उपयोग के कारण व्यावसायिक रोगों से ग्रसित होने के खतरे बढ़ जाते है।

  स्‍वेडवाच की रिपोर्ट में कहा गया कि बांग्लादेश के बंदरबन, चकोरिया और लालमोनिरहाट जिलों में तंबाकू के खेतों में काम करने वाले बच्चे भी कोई अपवाद नहीं हैं। सुरक्षा उपकरणों के बगैर उनकी त्वचा से निकोटीन और कीटनाशक के अवशोषण का खतरा बढ़ जाता हैं।

    रिपोर्ट में 16 साल के एक लड़के ने कहा, “मैं नियमित रूप से सो या खा नहीं पाता हूं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं हो गई हैं। मुझे कमजोरी महसूस होती है।”

  संसाधन प्रक्रिया के दौरान तंबाकू के पत्तों को भट्ठे में गर्म करने के बारे में बताते हुये उसने कहा, “भट्ठे के सामने काम करते समय मेरी आंखों में जलन और सीने में दर्द होता है और मुझे बहुत खांसी आती है।”

  किसानों, सरकारी अधिकारियों, समुदाय के नेताओं और कार्यकर्ताओं सहित 150 से अधिक लोगों के साथ किये गये साक्षात्कार पर आधारित अध्ययन में यह भी पाया गया कि तंबाकू के काम से स्कूली शिक्षा और भविष्य की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, क्‍योंकि काम करने के लिये बच्चों को स्‍कूल से निकाल लिया जाता है। 

   स्‍वेडवाच ने कहा, “रिपोर्ट में प्रभाव के आकलन को प्रकाशित और तीसरे पक्ष से ऑडिट करवा कर बैट और अन्य तंबाकू कंपनियों से अपनी आपूर्ति श्रृंखला से ‘धुंएं का परदा’ हटाने और लोगों तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।“

(रिपोर्टिंग-नीता भल्‍ला, संपादन-बेलिंडा गोल्‍डस्मिथ; कृपया थॉमसन रॉयटर्स की धर्मार्थ शाखा, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को श्रेय दें, जो मानवीय समाचार, महिलाओं के अधिकार, तस्करी, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन को कवर करती है। और समाचारों के लिये देखें http://news.trust.org) 

 

 

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