नई दिल्ली(थॉमसन रॉयटसस फाउंडेशन)-भारत में इलेक्ट्रीक पंखो की बिक्री 12%सालाना की िर से िढ रही है।इस िढती हुई बिक्री का कारण जलवायु पररवतसन से िढता तापमान और िडी आिािी को पसीने से ननजात दिलाने का यह माध्यम है।

अगर भारत में बिकने वाले पंखो की गुणवत्ता में सुधार ला दिया जाए तो बिजली की खपत में कमी और बिल में िचत के साथ ही िहुत सारे पॉवर पलांट िनाने से िचा जा सकेगा।ऐसे भी भारत को ग्रीन हाउस गैस उत्सजसन में कमी लाने की ज़रूरत है।

ववशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय पंखा ननमासताओं को सुपर इफीशशएंट सीशलंग फैन िनाने के शलए प्रोत्सादहत करने वाली योजना जो क्ट्लीन टेक्ट्नोलॉजी फंड से 50 मीशलयन डॉलर कजस लेकर शुरू की गई थी। अि अधर में है।

पंखा ननमासता और ववतरकों का मानना है कक, योजना में िी गई छूट के साथ सुपर सीशलंग फैन से बिल में की गई िचत,कम कीमत और कम गुणवत्ता वाले फैन खरीिने से ज्यािा िेहतर है, इस िात की जागरूकता ग्राहकों में पैिा करने की ज़रूरत है।

सरकारी प्रकक्रयाओं में हो रही िेरी से योजना के शलए कोष न उपल्िध होना, और इस गुणवत्ता के पंखे तैयार करने वाले संभाववत ननमासतां के पास तकनीकी का न होना ववशेषज्ञों के अनुसार िडा कारण है।

साथ ही छोटे ननमासता इस िात की भी शशकायत करते है कक, उन्हे इस योजना से िाहर रखने के शलए िोली की पात्रता का सरकारी माप-िंड िडे ननमासतओं के पक्ष में

ककया गया है।ऐसा इसशलए कक कायसक्रम समथसक समझते है, िडे ननमासताओं से ऐसे पंखो की बिक्री तेजी से िढाई जा सकती है।
अगले चार साल में पााँच मीशलयन सुपर इफीशशएंट पंखे भारतीय िाज़ार में उपल्िध कराने वाली महत्वकााँक्षी योजना कुछ समस्याओं के कारण िेरी की ओर अग्रसर हो रही है।

इस ववषय पर वल्डस िैंक के भारत स्स्थत उजास अथसशास्त्री मुदित नारायण ने थॉमसन रॉयटसस फाउंडेशन को ई-मेल भेजकर कहा “वतसमान में भारत सरकार ऐसे प्रोजेक्ट्टों के शलए स्थावपत मानिंडो के तहत इस पररयोजना के पॉयलट प्रोजेक्ट्ट की समीक्षा कर रही है तथा योजना आयोग और अंतर मंत्रालयों के साथ ववचार-ववमशस इस समीक्षा का अंग है।”
उर्ाा दक्षता पर ज़ोर

उजास िक्षता ब्यूरो के कायसक्रम के तहत सुपर इफीशशएंट पंखो का ननमासण, भारतीय घरों की ज़रूरत, पंखो में उजास की खपत कम करने का प्रयास है।

उजास िक्षता ब्यूरो भारत सरकार के ववद्युत मंत्रालय के अधीन कायस करती है।भारत में ववद्युत के शलए जीवाश्म ईंधन एक प्रमुख स्रोत है और उजास की खपत कम करने का इसका प्रयास जलवायु पररवतसन के खतरों में सुधार ला सकता है।

भारतीय घरों में उजास की खपत का मुख्य स्रोत ववद्युत रोशनी है।सस्ती और सघन फ्लोरोसेंट िल्िों के ईजाि से इसकी खपत में पयासपत कमी आई है।

उजास िक्षता ब्यूरो ने अन्य ववद्युत उपकरणों की उजास िक्षता, उपकरण पर अंककत करना अननवायस कर रखा है।ब्यूरो एयरकंडीशनर, रेफ्रीस्जरेटर ,टेलीववज़न सेट और अन्य उपकरणों की उजास िक्षता का माप 1 से 5 शसतारों के माप-िंड पर आकंता
है।उपकरण पर पााँच शसतारा का अंकन उपकरण की उजास िक्षता सवासधधक िशासता है।

अि तक पंखो को इस लेिशलंग प्रणाली से िाहर रखा गया है, स्जसे जल्ि ही उजास िक्षता ब्यूरो द्वारा ििलने की उम्मीि है।साथ ही पंखा ननमासताओं को जलवायु ननवेश कोष (क्ट्लाइमेट इंवेस्टमेंट फंड) और वल्डस िैंक के अंतरासष्ट्रीय पुनननसमासण और ववकास िैंक (इंटरनेशनल िैंक फोर ररंक्ट्सरक्ट्शन एंड डेवेल्पमेंट) की मिि से प्रोत्सादहत कर सुपर इफीशशएंट पंखे पेश करना चाहता है।

इस योजना के शलए आई.िी.आर.डी 2017 तक 50 मीशलयन डॉलर उपल्िध करायेगा वहीं िूसरी अंतराष्ट्रीय संस्थाए 130 मीशलयन डॉलर प्रिान करेंगी।

भारत में उजास क्षेत्र में काम करने वाली िो प्रनतस्ष्ट्ित सामास्जक संस्थाए पुणे की प्रयास एनजी ग्रुप और शस्क्ट्त सस्टेनेिल एनजी फाउंडेशन-दिल्ली को पंखो की उजास िक्षता िढाने के अधय्यन के शलए अनुिंधधत ककया गया है।इन्होने योजना की ननिेश पुस्स्तका अप्रैल में प्राकाशशत भी कर िी है।

लेककन प्रयास एनजी ग्रुप के अधधकारी आदित्य चुनेकर ने थॉमसन रॉयटसस फाउंडेशन को िताया कक ऊजास िक्षता पररयोजना को अभी भारतीय योजना आयोग से मंजूरी का इंतजार है स्जसमें महीने का समय लग सकता है। ववश्व िैंक के नारायण के मुताबिक, “ पररयोजना के शलए िोली लगाने की प्रकक्रया,चल रही है।……..”

लेककन उजास िक्षता ब्यूरो के उच्च अधधकारी अशोक कुमार के अनुसार िाजार में पंखो की पहली खेप में िेर हो सकती है। 2014 की गमी में उपल्िधता इस िात पर ननभसर करेगी कक सरकार की मंजूरी प्रकक्रया में ककतना समय लगता है।
बड़े ननमााताओं की ओर नजर

सुपर इफीशशएंट पंखो के ननमासण शुरू करने के शलए ‘िोली के पात्र’ के रूप में आि ननमासताओं को सूचीिद्द ककया गया है और भारत की एक िडी पंखा ननमासता कंपनी कॉम्पटन ग्रेव ने सूचीिद्द होने की पुस्ष्ट्ट भी की है।

कंपननयों को वपछले तीन सालों में सालाना 300,000 पंखे िेचने के आधार पर िोली लगाने के शलए पात्र के रूप में चयन ककया गया है।इस िारे में प्रयास का कहना है, “इस कसौटी का उ􀆧ेश्य कायसक्रम की सफलता के शलए हाननकारक अववश्वसनीय ननमासताओं के घदटया उत्पाि को िाहर करना है।”

मगर नारायण के अनुसार इसका उ􀆧ेश्य यह सुननस्श्चत करना है “कम समय में तेजी से पररवतसन,भाग लेने वाले ननमासताओं की िाजार में पैंि, व्यापक बिक्री चैनल, खुद्रा ववक्रेताओं से अनुिंध के अलावा उपयुक्ट्त तकनीकी का होना।”
उनके अनुसार समस्या यह है कक “भारत जैसे प्रतीस्पधासपूणस िाजार में छोटे ननमासताओ को िाजार संयोजन और बिक्री चैनल ववकशसत करने में सालों लग सकते है।”

नारायण के अनुसार इस तरह के ननयम “ इस आकार की पररयोजना के अंतसराष्ट्रीय उतपाि खरीि प्रथा पर आधाररत है।”
लेककन छोटे ननमासताओं का मानना है “इस तरह के ननयम भारत ननशमसत अशभनव और कुशल प्रौद्योधगकी को पैर जमाने से रोकना है।”

लेककन प्रयास और उसके सहयोगी द्वारा तैयार ननिेश पुस्स्तका िया करती है “नवीन अववष्ट्कारों और छोटे ननमासता उद्योग में पररवतसन के चालक हो सकते है।” लेककन साथ ही “यह महसूस ककया गया कक इस कसौटी पर कायस करना उनके

शलए िुष्ट्कर होगा(पहले ही िोली लगाने के शलए िडे ननमासताओं को शाशमल कर शलया गया है) क्ट्योकक इन अशभनव अववष्ट्कारों के व्यवसानयक उत्पािन एवं बिक्री के शलए स्थावपत ननमासताओं के साथ जुडने की आवश्यकता होगी”।

वे छोटी कंपननयां जो कहती है कक सुपर इफीशशएंट पंखो के ननमासण के शलए उनके पास कुशल मोटर तकनीक है,हालांकक वे अपनी इस तकनीक को उन िडी कंपननयों को सौपने में अननच्छुक है, स्जनके पास यह नहीं है।
साथ

साथ ही उन्हें यह भी डर है कक अपने मौजूिा मॉडलो के ऊपर इन महंगे सुपर इफीशशएंट पंखो की बिक्री को िढावा िेने के शलए इन िडी कंपननयों के पास भी िहुत कम ववत्तीय प्रोत्साहन है।

िेंगलुरू स्स्थत एक छोटी सी कंपनी ग्रीन पॉवर शसस्टम्स और सववससेज़ के प्रंिंध ननिेशक नागराज मन्नान जो इन पंखो के उत्पािन के शलए िोली लगाने में रूची रखते है कहते है “सुपर इफीशशएंट पंखो के ननमासण के शलए स्जस तकनीक की अवश्यकता है,उसके शलए इन िडे ननमासताओं को अपने मौजूिा ऐस्मेिली लाइन में ििलाव लाना होगा और महंगे पंखे बिकेंगे वे इसकी गारंटी चाहते है।”

वे आगे कहते है “इन िडी कंपननयों को भी साधारण पंखो की तुलना में सुपर इफीशशएंट पंखो में छोटे लाभ की गुंजाइश दिखती है। स्जससे बिक्री िढाने के शलए प्रोत्साहन की कमी होती है।”

क़ोई ग्राहक है?

ववशेषज्ञों के अनुसार भारत में सुपर इफीशशएंट पंखो के शलए खरीिार खोजना सिसे िडी िाधा हो सकती है।मौजूिा समय में, िाजार में सीशलंग फैन 1800

रूपए($36) में उपल्िध है,वहीं एक ननमासता के अनुसार सुपर इफीशशएंट पंखे की कीमत 3200 रूपए ($64) से कम नहीं हो सकती।
वल्डस िैंक के नारायण कहते है इस पररयोजना के तहत सुपर इफीशशएंट पंखो के ननमासण के शलए चुने गए ननमासताओं को प्रनत पंखा 500 रूपए($8.39)प्रोत्साहन राशश प्रापत करने के वे हकिार होंगे।अगर इस राशश को ग्राहको के दहस्से में िे दिया जाए तो कुछ हि तक नए पंखो की कीमत कम हो सकती है।

इन नए पंखो को सांस्कृनतक प्रनतरोध का भी सामना करना पर सकता है, क्ट्योंकक भारतीय खरीिार उत्पािों का चयन िक्षता के िजाय रंग और रूप के आधार पर करते है,यह जानकारी एक गैरसरकारी उपभोक्ट्ता संगिन कन्जूयूमर वॉयस ने जनवरी 2013 के अपने प्रकाशन में दिया है।

अमीर खरीिारों की रूची लाइट लगे खूिसूरत पंखो की अधधक कीमत िेने में है, िजाय बिजली की िचत करने वाले के, एक िडे बिजली उपकरण ववतरक के.एस.आर इलेक्ट्रीकल्स के प्रवक्ट्ता अणसव काला ने इसकी पुष्ट्टी की।
वे कहते है “हमारे खरीिार सजावटी और गहरे रंग के शलए उच्च मूल्य का भुगतान करना चाहते है,उजास िचत इन सजावटी वस्तुओं के बिना उनके शलए कोई मायना नहीं रखता।”

नतीजतन “मुझे संिेह है,ककतने एस.ई.ई पंखे हम िेच सकते है।”
कुमार कहते है फैन पररयोजना का “एक अंग उपभोक्ट्ताओं को उजास िचत करने वाले उपकरणो के प्रनत जागरूकता पैिा करना है।”

कुमार कहते है इस मीडडया अशभयान का ननमासण वी.ई.ई द्वारा चलाए जा रहे टी.वी ववज्ञापन िचत के शसतारे पर आधाररत होगा, जो उजास िचत के क्षेत्र में भारत के योगिान को दिखाएगा।

सुजीत चक्रवती दिल्ली स्स्थत ववज्ञान और पयासवरण पत्रकार है।यह लेख क्ट्लाइमेट इंवेस्टमेंट फंड द्वारा ववत्त पोवषत एक श्ृंखला का दहस्सा है।

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