– रोली श्रीवास्तव
मुंबई, 31 जनवरी (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) – बबली के तकिये के नीचे एक महीने पुराना हिन्दी का एक अखबार है जिसे वह अक्सर निकाल कर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की स्थगित हो चुकी भारत की यात्रा के बारे में पढ़ती रहती है। इस प्रकार अपनी अंगुलियां उन शब्दों पर फिराते हुये वह स्वयं को अपने देश से जोड़ती रहती है।
बांग्लादेश से तस्करी कर मुंबई के एक वेश्यालय में बेची गई बबली ने पिछले वर्ष उत्तरी मुंबई के उपनगरीय क्षेत्र कांदीवली में एक आश्रय स्थल में हिन्दी भाषा सीखनी शुरू की। वेश्यालय से छुड़ाने के बाद उसे यहां रखा गया था।
इन हिन्दी कक्षाओं की बदौलत अब वह धाराप्रवाह तरीके से हिन्दी पढ़, लिख और बोल सकती है। इससे लड़कियों को उन्हें तस्करी करके लाए गए रास्तों को ढूंढने और अधिक सटीकता से विवरण दर्ज कराने में मदद मिलती है।
रेस्क्यू फाउंडेशन शेल्टर में हिन्दी सीखने का एक और लाभ यह हुआ कि इनमें से कुछ लड़कियों को इस वर्ष नियमित स्कूलों में भी दाखिला मिल गया है।
बबली ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया, “मुझे बांग्लादेश से कोलकाता लाया गया था, लेकिन मैं उन रेलवे स्टेशनों के नाम नहीं पढ़ सकी थी जो मुंबई आने के दौरान मेरे रास्ते में पड़े थे।”
“मुंबई पहुंचने के कुछ दिनों के बाद अपने आसपास के लोगों की बातचीत से मुझे अहसास हुआ कि मैं मुंबई में थी।”